कता

15/10/2013 21:50


सुकून खोजने न जाने किस किस दर पहुंचा।
सुकून आया जब लौट कर के घर पहुंचा।
दिल ही मरहम है दुखते दिल के जख्मों का
इलाज की खातिर यूं ही शहर शहर पहंुचा।